Wednesday, September 16, 2026
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Bihar Cyber Crime: सोशल मीडिया पर गाली-गलौज पड़ी तो लगेगा ‘गुंडा एक्ट’! एक साल तक जेल की तैयारी

by Anuradha Pandey

किसी बात पर गुस्सा आया. मोबाइल उठाया और सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति को गाली लिख दी. अश्लील शब्दों का इस्तेमाल कर दिया या ऐसी अभद्र टिप्पणी कर दी, जिसे बाद में खुद हटाना पड़ा.

पोस्ट कुछ मिनट बाद डिलीट हो सकती है, लेकिन उसका स्क्रीनशॉट किसी दूसरे मोबाइल में बचा रह सकता है. शिकायत हुई तो यही स्क्रीनशॉट पुलिस तक पहुंच सकता है.

बिहार में अब ऐसी हरकत पहले से ज्यादा भारी पड़ सकती है.

राज्य सरकार साइबर अपराधियों और सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल करने वालों को बिहार क्राइम कंट्रोल एक्ट के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है. आम बोलचाल में इसे गुंडा एक्ट भी कहा जा रहा है.

प्रस्तावित बदलाव के मुताबिक सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति के खिलाफ गाली-गलौज करने, अश्लील शब्द लिखने या अभद्र टिप्पणी करने वाले व्यक्ति पर इस कानून के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है.

आरोप साबित होने पर छह महीने से एक साल तक जेल हो सकती है.

Bihar Cabinet ने क्या मंजूर किया?

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में बिहार क्राइम कंट्रोल एक्ट, 2024 में बदलाव के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई.

कैबिनेट ने इससे जुड़े संशोधन बिल के मसौदे पर भी मुहर लगा दी है.

इस बदलाव का बड़ा हिस्सा साइबर अपराध और सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल से जुड़ा है. सरकार चाहती है कि डिजिटल दुनिया में होने वाले नए तरह के अपराधों से निपटने के लिए पुलिस के पास ज्यादा मजबूत कानूनी अधिकार हों.

पेपर लीक के मामलों को भी इस कानून के दायरे में लाने की तैयारी है. लेकिन साइबर अपराध से जुड़ा बदलाव सीधे उन लोगों पर असर डाल सकता है, जो फर्जी अकाउंट बनाकर आपत्तिजनक पोस्ट करते हैं या इंटरनेट का इस्तेमाल किसी को गाली देने और बदनाम करने के लिए करते हैं.

हालांकि, अभी कैबिनेट ने प्रस्ताव और बिल के मसौदे को मंजूरी दी है. कानून बनने की बाकी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नए प्रावधान लागू होंगे.

Social Media पर क्या लिखना पड़ सकता है भारी?

प्रस्तावित बदलाव में इंटरनेट पर चलने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का साफ तौर पर जिक्र किया गया है.

इसके मुताबिक किसी व्यक्ति के खिलाफ गाली देने, अश्लील शब्दों का इस्तेमाल करने या अभद्र टिप्पणी करने पर कार्रवाई की जा सकती है.

यानी फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, वॉट्सऐप और दूसरे इंटरनेट आधारित प्लेटफॉर्म पर लिखी गई आपत्तिजनक बात जांच के दायरे में आ सकती है.

कई बार लोग मान लेते हैं कि फर्जी नाम से अकाउंट बनाकर वे कुछ भी लिख सकते हैं. उन्हें कोई पहचान नहीं पाएगा. लेकिन मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, इंटरनेट कनेक्शन और फोन से जुड़े डिजिटल निशानों के जरिए जांच एजेंसियां ऐसे खातों तक पहुंच सकती हैं.

किसी पोस्ट को डिलीट कर देना भी हमेशा बचने का रास्ता नहीं होता. उसका स्क्रीनशॉट, लिंक या दूसरी डिजिटल जानकारी शिकायत करने वाले के पास मौजूद हो सकती है.

अंतिम कानून और उसके नियम सामने आने के बाद ही यह पूरी तरह साफ होगा कि किन मामलों में बिहार क्राइम कंट्रोल एक्ट लगाया जाएगा.

कितनी सजा का प्रस्ताव?

बिहार सरकार की ओर से मंजूर प्रस्ताव में छह महीने से एक साल तक जेल की सजा का प्रावधान रखा गया है.

इसका मतलब है कि सोशल मीडिया पर गंदी या अश्लील भाषा का इस्तेमाल करने का मामला केवल अकाउंट बंद होने या पोस्ट हटाए जाने तक सीमित नहीं रह सकता.

अगर शिकायत दर्ज होती है और आरोप साबित होते हैं, तो आरोपी को जेल जाना पड़ सकता है.

सरकार का कहना है कि इस बदलाव से साइबर अपराध, डिजिटल प्लेटफॉर्म के गलत इस्तेमाल और संगठित अपराध पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.

आज साइबर अपराध केवल ऑनलाइन ठगी तक सीमित नहीं है. फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, झूठी और भड़काऊ पोस्ट, अश्लील टिप्पणी और किसी व्यक्ति को लगातार ऑनलाइन परेशान करना भी बड़ी समस्या बन चुका है.

सरकार इसी बदलती हुई चुनौती के हिसाब से कानून को सख्त करना चाहती है.

क्या अभी Social Media पर कार्रवाई नहीं होती?

बिहार पुलिस सोशल मीडिया पर फर्जी, भड़काऊ और आपत्तिजनक सामग्री डालने वालों के खिलाफ अभी भी कार्रवाई करती है.

साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट यानी सीसीएसयू और स्थानीय साइबर पुलिस स्टेशन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की निगरानी करते हैं.

किसी पोस्ट या अकाउंट के खिलाफ शिकायत मिलने पर जांच की जाती है. जरूरत पड़ने पर भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट यानी आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज होती है.

आपत्तिजनक पोस्ट को सोशल मीडिया से हटवाया जा सकता है. फर्जी और नियम तोड़ने वाले अकाउंट बंद करवाए जा सकते हैं. अपराध गंभीर होने पर आरोपी को गिरफ्तार भी किया जा सकता है.

अब सरकार ऐसे मामलों को बिहार क्राइम कंट्रोल एक्ट के दायरे में लाकर पुलिस को कार्रवाई का एक और मजबूत रास्ता देना चाहती है.

सात महीने में दर्ज हुईं 475 FIR

राज्य पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों की ओर से दिए गए आंकड़े बताते हैं कि सोशल मीडिया और साइबर अपराध की समस्या कितनी बड़ी है.

जनवरी से जुलाई 2026 के बीच साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट ने 475 एफआईआर दर्ज कीं.

इन मामलों में 103 लोगों को गिरफ्तार किया गया.

इसी दौरान सोशल मीडिया से 1,320 आपत्तिजनक पोस्ट हटवाए गए. पुलिस की कार्रवाई के बाद 529 फर्जी और आपत्तिजनक सोशल मीडिया अकाउंट भी बंद किए गए.

सात महीने के ये आंकड़े बताते हैं कि पुलिस हर दिन सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री का सामना कर रही है, जो फर्जी, भड़काऊ या आपत्तिजनक हो सकती है.

1,320 पोस्ट हटाए जाने का मतलब है कि औसतन हर दिन छह से ज्यादा पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई हुई.

इसी तरह 529 अकाउंट बंद होना बताता है कि फर्जी पहचान बनाकर सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल करने का मामला भी छोटा नहीं है.

Fake Account बनाकर गाली देना भी नहीं होगा आसान

कई लोग सोशल मीडिया पर नकली नाम और किसी दूसरे व्यक्ति की फोटो लगाकर अकाउंट बना लेते हैं. उन्हें लगता है कि पहचान छिप जाने के बाद वे किसी को भी गाली दे सकते हैं या फर्जी जानकारी फैला सकते हैं.

लेकिन फर्जी नाम का मतलब यह नहीं है कि अकाउंट चलाने वाला व्यक्ति पुलिस की पहुंच से बाहर हो गया.

ऐसे अकाउंट बनाने में इस्तेमाल मोबाइल नंबर, सिम कार्ड, ईमेल, फोन और इंटरनेट की जानकारी जांच में काम आ सकती है.

कई बार एक ही व्यक्ति कई फर्जी अकाउंट बनाकर किसी को लगातार परेशान करता है. एक अकाउंट बंद होने पर वह दूसरे नाम से नया अकाउंट बना लेता है.

पुलिस की ओर से 529 फर्जी और आपत्तिजनक अकाउंट बंद कराया जाना दिखाता है कि ऐसे मामलों की बड़े स्तर पर जांच हो रही है.

प्रस्तावित बदलाव लागू होने के बाद गंभीर मामलों में बिहार क्राइम कंट्रोल एक्ट के तहत भी कार्रवाई हो सकती है.

Cyber Crime अब केवल बैंक खाते से पैसे चोरी करना नहीं

साइबर क्राइम का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों को बैंक फ्रॉड, ओटीपी चोरी या नकली निवेश ऐप याद आता है.

लेकिन डिजिटल अपराध का दायरा इससे बहुत बड़ा है.

फर्जी अकाउंट बनाकर किसी व्यक्ति को बदनाम करना, अश्लील मैसेज भेजना, झूठी जानकारी फैलाना और सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री डालना भी जांच के दायरे में आ सकता है.

कई बार एक फर्जी पोस्ट थोड़े समय में हजारों लोगों तक पहुंच जाती है. लोग बिना जांच किए उसे आगे भेज देते हैं. इससे किसी व्यक्ति की बदनामी के साथ तनाव या हिंसा जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है.

सरकार का कहना है कि कानून में बदलाव से पुलिस को अपराध के इन नए तरीकों से निपटने में मदद मिलेगी.

अभी लागू नहीं हुआ नया नियम

यह समझना बेहद जरूरी है कि बिहार कैबिनेट ने फिलहाल संशोधन प्रस्ताव और बिल के मसौदे को मंजूरी दी है.

अभी इसे कानून बनाने की बाकी प्रक्रिया पूरी होनी है. इसलिए यह नहीं माना जाना चाहिए कि कैबिनेट की बैठक खत्म होते ही हर आपत्तिजनक पोस्ट पर नया कानून लागू हो गया है.

कानून बनने के बाद उसके अंतिम शब्द और नियम बताएंगे कि किन मामलों में कार्रवाई होगी, शिकायत की जांच कैसे की जाएगी और बिहार क्राइम कंट्रोल एक्ट की धाराएं कब लगेंगी.

फिलहाल सरकार ने अपनी मंशा साफ कर दी है कि साइबर अपराध और सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल को हल्के में नहीं लिया जाएगा.

मोबाइल पर लिखने से पहले सोचने का समय

सोशल मीडिया लोगों को अपनी बात रखने की आजादी देता है. लेकिन मोबाइल की स्क्रीन के पीछे बैठकर किसी को गाली देना या अश्लील भाषा का इस्तेमाल करना भारी पड़ सकता है.

एक गुस्से भरी पोस्ट कुछ सेकंड में लिखी जा सकती है. लेकिन वही पोस्ट एफआईआर, पुलिस जांच और अदालत तक पहुंच सकती है.

बिहार में जनवरी से जुलाई के बीच 475 एफआईआर, 103 गिरफ्तारियां, 1,320 पोस्ट हटाने और 529 अकाउंट बंद करने की कार्रवाई पहले ही हो चुकी है.

अब बिहार क्राइम कंट्रोल एक्ट में प्रस्तावित बदलाव के बाद साइबर अपराधियों और सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ शिकंजा और सख्त हो सकता है.

सीधा संदेश यही है-मोबाइल आपका है, लेकिन सोशल मीडिया पर लिखी बात की जिम्मेदारी भी आपकी ही होगी.

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