ज़रा सोचिए… आप किसी अस्पताल में इलाज कराने जाते हैं. डॉक्टर आपकी बीमारी, टेस्ट रिपोर्ट, दवाइयों का पूरा रिकॉर्ड अपने सिस्टम में सेव कर लेते हैं. आपको लगता है कि यह जानकारी पूरी तरह सुरक्षित है और सिर्फ डॉक्टर या अस्पताल ही इसे देख सकता है. लेकिन अगर एक दिन पता चले कि आपकी मेडिकल हिस्ट्री, डॉक्टर की सलाह, जांच रिपोर्ट, घर का पता, मोबाइल नंबर, यहां तक कि हेल्थ इंश्योरेंस और सरकारी हेल्थ कार्ड की जानकारी भी किसी हैकर के हाथ लग गई है, तो शायद आप भी परेशान हो जाएंगे.ऑस्ट्रेलिया में ठीक ऐसा ही एक बड़ा साइबर हमला हुआ है.
क्या हुआ है?
ऑस्ट्रेलिया की बड़ी हेल्थकेयर कंपनी पार्टनर्ड हेल्थ (Partnered Health) साइबर हमले का शिकार हो गई है. कंपनी ने खुद स्वीकार किया है कि उसके नेटवर्क से मरीजों की निजी और मेडिकल जानकारी चोरी हो गई है. यह हमला 23 जून को हुआ था और इसकी जांच के बाद कंपनी ने माना कि उसके नेटवर्क के कई क्लीनिकों का डेटा प्रभावित हुआ है.
कितने क्लीनिक प्रभावित हुए?
कंपनी के मुताबिक उसके 21 मेडिकल क्लीनिक इस साइबर हमले की चपेट में आए हैं.
ये क्लीनिक ऑस्ट्रेलिया के कई बड़े शहरों जैसे-
सिडनी
मेलबर्न
कैनबरा
में मौजूद हैं. हालांकि कंपनी के देशभर में 60 से ज्यादा मेडिकल सेंटर हैं.
क्या-क्या जानकारी चोरी हुई?
यही इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक हिस्सा है. हैकर्स सिर्फ नाम और मोबाइल नंबर लेकर नहीं गए.
चोरी हुए डेटा में शामिल हैं
मरीजों के नाम
जन्मतिथि
घर का पता
मोबाइल नंबर
ईमेल
मेडिकेयर (सरकारी स्वास्थ्य कार्ड) की जानकारी
प्राइवेट हेल्थ इंश्योरेंस का विवरण
कंसेशन कार्ड की जानकारी
डॉक्टर की सलाह
इलाज का पूरा रिकॉर्ड
जांच रिपोर्ट
पैथोलॉजी रिपोर्ट
डायग्नोस्टिक रिपोर्ट
रेफरल लेटर
डॉक्टर के कंसल्टेशन नोट्स
मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री तक साइबर अपराधियों की पहुंच बन गई.
कंपनी ने क्या कहा?
पार्टनर्ड हेल्थ ने कहा कि एक दुर्भावनापूर्ण हैकर (Malicious Actor) ने उनके सिस्टम में घुसकर डेटा हासिल किया. कंपनी ने मरीजों से माफी भी मांगी.
उसने कहा कि लोग अपनी निजी और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भरोसे के साथ अस्पताल को देते हैं और इस घटना से उन्हें हुई चिंता के लिए कंपनी खेद जताती है.
अब कंपनी क्या कर रही है?
कंपनी ने इस मामले की जानकारी-ऑस्ट्रेलियन साइबर सिक्योरिटी सेंटर, ऑफिस ऑफ द ऑस्ट्रेलियन इंफॉर्मेशन कमिश्नर, और कानून लागू करने वाली एजेंसियों
को दे दी है. इसके अलावा कंपनी ने अदालत से भी गुहार लगाई है कि अगर हैकर्स के पास यह डेटा है, तो उसे सार्वजनिक न किया जाए और न ही उसका गलत इस्तेमाल किया जाए.
यह कंपनी कितनी बड़ी है?
पार्टनर्ड हेल्थ की शुरुआत 2013 में हुई थी.
आज इसके देशभर में
60 से ज्यादा मेडिकल सेंटर
स्किन कैंसर क्लीनिक
मेंटल हेल्थ सेंटर
एलाइड हेल्थ सेंटर चल रहे हैं. कंपनी की सेवाएं 50 लाख से ज्यादा लोगों तक पहुंचती हैं. यानी इस साइबर हमले का असर बहुत बड़ी आबादी पर पड़ सकता है.
हाल ही में बड़ी डील भी हुई थी. दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में हेल्थकेयर कंपनी बूपा (Bupa) ने पार्टनर्ड हेल्थ का अधिग्रहण करने का ऐलान किया था.इसी बीच यह साइबर हमला सामने आ गया.
ऑस्ट्रेलिया में क्यों बढ़ रहे हैं डेटा चोरी के मामले?
यह कोई पहला मामला नहीं है. ऑस्ट्रेलिया में पिछले कुछ समय से साइबर हमलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. हाल ही में एयरलाइन क्वांटस (Qantas) पर भी बड़ा साइबर हमला हुआ था. उस घटना में करीब 57 लाख ग्राहकों की निजी जानकारी प्रभावित हुई थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक उसका कुछ डेटा डार्क वेब तक पहुंच गया था.
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए डेटा ब्रीच
ऑस्ट्रेलिया के सूचना आयुक्त कार्यालय के मुताबिक, 2025 में डेटा चोरी की 1,205 घटनाओं की जानकारी दी गई. यह 2024 के मुकाबले 8 फीसदी ज्यादा है.
यानी साइबर अपराधी अब सिर्फ बैंक या सरकारी वेबसाइट ही नहीं, बल्कि अस्पतालों और हेल्थ सिस्टम को भी निशाना बना रहे हैं.
आम आदमी को इससे क्या सीख मिलती है?
आज हमारी सबसे निजी जानकारी अस्पतालों के पास होती है. कौन-सी बीमारी हुई, कौन-सी दवा चल रही है, कौन-सी जांच कराई, किस डॉक्टर से इलाज कराया-सब कुछ डिजिटल रिकॉर्ड में मौजूद रहता है. अगर ऐसे सिस्टम सुरक्षित नहीं होंगे, तो सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि लोगों की निजता भी खतरे में पड़ सकती है. इसलिए जब भी किसी अस्पताल, बैंक या किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से डेटा चोरी की खबर आए, तो सतर्क रहना जरूरी है.अगर आपको किसी संस्था की ओर से पासवर्ड बदलने, पहचान सत्यापित करने या संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिले, तो उसे नजरअंदाज न करें.
कुल मिलाकर…
ऑस्ट्रेलिया के पार्टनर्ड हेल्थ पर हुआ साइबर हमला यह दिखाता है कि अब हैकर्स सिर्फ बैंक खातों या सोशल मीडिया प्रोफाइल तक सीमित नहीं हैं. वे अस्पतालों और हेल्थकेयर सिस्टम को भी निशाना बना रहे हैं, जहां लोगों की सबसे संवेदनशील जानकारी मौजूद होती है. इस घटना ने एक बार फिर याद दिलाया है कि डिजिटल सुविधाओं के साथ मजबूत साइबर सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है, क्योंकि एक डेटा ब्रीच सिर्फ जानकारी नहीं चुराता, बल्कि लाखों लोगों के भरोसे को भी नुकसान पहुंचाता है.
